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Monday, July 12, 2010

यहीं तो हूँ मैं,......

यहीं तो हूँ मैं,
कहाँ जा सकती हूँ अब
कहीं भी तो नहीं,
बस खुद को खुद में, तो कभी तुम में खुद को तलाशती रहती हूँ ,
जो साया तुम्हारे पीछे है, कहीं वो मेरा तो नहीं,
या शायद जो साया मेरे साथ है, वो तुम्हारा तो नहीं,
बस यूँही भटकती रहती हूँ मैं अक्सर अंधेरों में ,
लेकिन देखो ना ,फिर भी गुम नहीं हो पाती मैं,
क्यूंकि तुम मुझे ढूंढ ही लाते हो,
कभी ख्यालों में, कभी खवाबों में,
तुम कब हाथ थाम लेते हो ,पता ही नहीं चलता,
इसीलिए खुद को तन्हा भी ,तो नहीं कह सकती ना में,
तुम्हारा अहसास भर ,रोज़ मुझे चंद साँसे दे जाता है,
तुम्हे जीने के लिए ,
तुम में ,खुद को फिर से ढूंढ लाने के लिए,
तुम्हारे नज़दीक आने के लिए,
जब तुम छू लेते हो ,मेरे नर्म ,गर्म होंठों को ,
बस आज मुझे मर जाने दो अपनी बाहों में ,
बस एक बार,
बस इस बार,
बस आखिरी बार....

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