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Thursday, February 10, 2011

शब्द कहाँ से लाते हो...

शब्द कहाँ से लाते हो,
बातें तो सब मेरी ही होती हैं इनमे,
तुम उनको मेरी शक्ल कैसे दे पाते हो,
माना लफ्ज़ लफ्ज़ कहता है बात मेरी ,
तुम उनसे अपना मन कैसे बहलाते हो,
तुम मुझे कभी चाँद कहते हो ,कभी ख्वाब कहते हो,
फिर तुम मेरे साथ कब और कैसे सो पाते हो,
आगोश में तो मैं होती हूँ तुम्हारी ,
फिर तुम खुद को मेरी आगोश में कैसे पाते हो,
कभी मेरी ज़ुल्फ़ कभी मेरा चेहरा सहलाते हो,
कभी हाथ ओर कभी होंठो से मुझे नहलाते हो,
मै पिघल कर बिखर जाती हूँ रात भर कतरा कतरा करके,
फिर तुम सुबह तक मुझे कैसे समेट लाते हो,
तुम्हारी बाहों में रात कटे या सवेरा जागे ,
तुम मुझे कैसे मीठी नींद सुलाते हो,
चाँद की बिंदी ओर सितारों से मेरी मांग सजाते हो ,
तुम जब भी छूते हो मैं बेहोशी में होती हूँ,
फिर तुम ओर छू कर मुझे होश में लाते हो,
पास आ तो जायुं मैं भी तुम्हारे लेकिन ....
मैं भी जल जाती हूँ ,और तुम भी झुलस जाते हो,
कहते हो खुद को मासूम ,ओर राज बन मेरे दिल मैं उतर जाते हो,
सुबह होते ही तुम खुद को मासूम और मुझे नीलम बताते हो.
ये सारे शब्द कहाँ से लाते हो.

16 comments:

  1. वाह क्या खूब लिखा है ……………भावनाओ का सुन्दर समन्वय।

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  2. Hi..

    Man tera aur baatain unki...
    Yahi preet kahlaati hai...
    Jeevan main aisi baatain hi..
    Tan-Man ko harshati hain...

    Sundar mano-bhav...

    Deepak..

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  3. wah...wah..wahh..
    prem ras me sarabor rachna romanchit kar gayi .

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  4. aap ye shabd kahan se layin ... bahut hi komal komal

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  5. शब्द कहाँ से लाते हो,
    बातें तो सब मेरी ही होती हैं इनमे,
    तुम उनको मेरी शक्ल कैसे दे पाते हो,
    ..badiya sawal puchha hai...sath mein jawab bhi laajawab!! badiya prastuti

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  6. दिल के सुंदर एहसास
    हमेशा की तरह आपकी रचना जानदार और शानदार है।

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  7. बसंत पंचमी के अवसर में मेरी शुभकामना है की आपकी कलम में माँ शारदे ऐसे ही ताकत दे...:)

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  8. वाह क्या बात है बहुत ही खूबसूरत रचना !

    बधाई !!

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  9. सुन्दर भाव.सुन्दर शब्द .
    आप की पिछली रचना के साथ मिला के पढ़ा.
    दोनों एक ही भाव लिए हुए हैं.
    लगता है अभी भी कुछ कहना बाकी है.
    सलाम.

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  10. अपने अराध्य के प्रति इतनी निष्ठा, आस्था और पूर्ण समर्पण का यह भाव कम ही देखने को मिलता है......... सुन्दर कविता के लिए आभार.

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  11. अपने अराध्य के प्रति इतनी निष्ठा, आस्था और पूर्ण समर्पण का यह भाव कम ही देखने को मिलता है......... सुन्दर कविता के लिए आभार.
    समय मिले तो http;//baramasa98.blogspot.com भी देखें और मार्गदर्शन अवश्य करना चाहें और हो सके तो अनुसरण करने का कष्ट करें. अनेकानेक शुभकामनाओं सहित

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  12. मन भाव समेटे ...सुंदर रचना

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  13. aapke issi ahsaas ka main mureed hoon..:)
    kya kahun, samajh nahi pata...!!
    wahi prashn:
    ye sundar shabd kahan se late ho.?

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  14. वाह! बहुत सुन्दर प्रस्तुति!

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