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Thursday, February 13, 2014

तुम क्युं सोचते हो मुझे ..


 
तुम क्यूँ सोचते हो मुझे......?
मुझे तो तुम हर घडी दिखाई देते हो...
इसलिए सोचती रहती हूँ तुम्हे....
और तुम्हे छू भी लेती हूँ,
हवाओं की तरह ....
भीग भी जाती हूँ,
दूब पर पड़ी ओस की बूंदों की तरह ..
लेकिन तुम क्यूँ सोचते हो मुझे ...?
और भला मैं कैसे न सोचूं तुम्हे.....!!!
अधूरी मुलाकात छोड़ जाते हो...
आधी अधूरी बात छोड़ जाते हो...
और रह जाती हूँ सिर्फ मैं,
आधे अधूरे सपनों के साथ,
कुछ खामोश से ख्यालों के साथ,
रात भर जागने के लिए,
तुम्हे सोचने के लिए,
सुबह के इंतज़ार में ...
तुम्हारी बातों के प्यार में...
रह जाती हूँ तन्हा ...
तुम्हे सोचने के लिए....
अब कहो....
तुम क्यूँ सोचते हो मुझे.....[नीलम]
—-
 
 
 
तुम  अक्सर सवाल करती हो..
क्यूँ सोचता हूँ मैं तुम्हे ?
जरा पास आओ ,
बताना है आज ,
क्यूँ सोचता हूँ तुम्हे...
तुम्हारी खनक भरी हंसी गूंजती है हर वक़्त मेरे कानो में ..
इसलिए सोचता हूँ तुम्हे,
तुम्हारा अक्स मेरे दर-ओ - दिवार पर उभर आता है,
इसलिए सोचता हूँ तुम्हे...
रात की चाँदनी में चाँद बनकर जब मेरे ख्यालों की छत पर टहलती हो,
तब सोचता हूँ तुम्हे...
घने काले बादल जब घिर आते हैं ,
और जब बूंदों के साथ साथ भिगो जाती हो तुम मुझे,
तब सोचता हूँ तुम्हे...
जब सुबह की पहली किरण मेरे सिरहाने तक आती है,
और तुम छू लेती हो गुनगुने अहसास की तरह,
तब सोचता हूँ तुम्हे...
कहाँ खो गयीं तुम ....?
उफ़!!! तुम फिर से सोचने लगी हो ना मुझे ...[नीलम]

7 comments:

  1. सुंदर सवाल जबाब :)
    प्रेम से परिपूर्ण :)
    _______________
    बेहतरीन !!

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  2. भावभिव्यक्ति लाजबाब है

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  3. तुम फिर से सोचने लगी हो ना मुझे .......... :)

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  4. सुन्दर तरीके से कही गयी बात |

    सादर

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  5. Bahut Shandar Blog or behtreen kavita.
    =============================
    Om Purohit Kagad
    www.omkagad.blogspot.com

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  6. aap sabhi ka tahe dil se shukriya.. Mukesh ji, Neelima, Vibha ji, Aakash, Om Purohit ji.

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  7. एक दिव्य अनुभूति ....बहुत सुंदर रचना ...!!

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