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Tuesday, September 16, 2014

क्या कहा सोच लूँ ..

क्या कहा !!!!!
सोच लूँ मैं ???
मैंने तो सोच लिया था ,
उसी दिन ,
जब तुम मिले थे
अनजान सी महफ़िल में ,
हाँ तब तुम अजनबी तो थे ,
मगर....
जाने क्यूँ तब भी तुम अजनबी नहीं लगे थे ,
दिख रहा था दोनों को
एक दूजे में अपनत्व भरा अहसास ,
ऐसी ही तो थी ना अपनी
पहली मुलाक़ात ,
तो बस अब सोचना नहीं ,
समझना है हम दोनों को ,
क्यूंकि..

अब हम अजनबी नहीं हैं ना !!!_[नीलम] _

 


1 comment:

  1. chutki bhar chuvan namkeelee si ...zindgi bhar ke liye jod deti hai .....

    kitna sahaj likhti hain aap neelu ji...

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