Ek koshish khud ke ahsaason se aapke ahsaason ko shabdon ke jariye chhoo lene ki...
कितना प्यारा तो लिखती हैं आप , बस आप भी लौट आइये अब और लिखना शुरू करिये इस पर दोबारा ,अब मैंने अनुसरण कर लिया है तो आपके लिखते ही यहीं मिलूंगा आपको
आपका हार्दिक आभार अजय जी🙏😊
सच कहूँ, आपकी ये पंक्तियाँ पढ़कर दिल नरम सा हो गया। “चाँद टांक दिया तुम्हारी खिड़की पर” वाली बात मुझे बहुत प्यारी लगी। मैं जब ऐसी लाइनें पढ़ता हूँ तो मुझे अपने पुराने दिन याद आ जाते हैं, जब हम भी किसी की याद में छोटी-छोटी बातें सोचते रहते थे।
कितना प्यारा तो लिखती हैं आप , बस आप भी लौट आइये अब और लिखना शुरू करिये इस पर दोबारा ,अब मैंने अनुसरण कर लिया है तो आपके लिखते ही यहीं मिलूंगा आपको
ReplyDeleteआपका हार्दिक आभार अजय जी🙏😊
Deleteसच कहूँ, आपकी ये पंक्तियाँ पढ़कर दिल नरम सा हो गया। “चाँद टांक दिया तुम्हारी खिड़की पर” वाली बात मुझे बहुत प्यारी लगी। मैं जब ऐसी लाइनें पढ़ता हूँ तो मुझे अपने पुराने दिन याद आ जाते हैं, जब हम भी किसी की याद में छोटी-छोटी बातें सोचते रहते थे।
ReplyDelete