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Monday, August 16, 2010

मेरे खबाब


कुछ मेरी अनकही,
कुछ अपनी कही हुए वो सब बातें,
सब उकेर दो कागजों पर,
कुछ सपने लिखना ,
कुछ लम्हे लिखना,
जिन्हें अक्सर जीती हूँ मैं तुम्हारे लिए ,
कुछ रातें,
कुछ बीते हुए, अहसास भी लिख देना,
जीना चाहती हूँ मैं फिर से वही अहसास,
फिर से सजा लुंगी अपनी आँखों में,
भर लुंगी उन्हें मोतियों की तरह,
लेकिन तुम्हे आज एक वादा करना होगा,
इन मोतियों को गिरने नहीं दोगे कभी,
किसी और के कंधे पर,
खा लो कसम...
समेट लोगे मुझे,
मेरे खवाबों को सजा लोगे अपनी पलकों पर
मेरे लिए तोड़  लाओगे वो चाँद,
जो रोज़ मुझे और मेरी मोहब्बत को निहारा करता है,
अक्सर तुम्हारी खिड़की से,
इस बार छिपा दूंगी में उसे किसी कोने में,
नहीं चाहिए तुम्हारे होते हुए मुझे चाँद और चांदनी.
और फिर बस में और तुम, और हमारी रात,
तुम और तुम्हारी बात.
बस तुम और तुम्हारी, मेरी बात.

32 comments:

  1. कुछ मेरी अनकही,
    कुछ अपनी कही हुए वो सब बातें,
    सब उकेर दो कागजों पर,
    कुछ सपने लिखना ,
    कुछ लम्हे लिखना,

    kitni pyari baate kahti ho Neelima jee.......kahan se ye soch laati ho aap!!

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  2. ब्‍लागजगत पर आपका स्‍वागत है ।

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  3. आपके ब्लॉग में चित्र संयोजन और आपकी कविता पंक्तियां मन को बहुत भाईं। मेरी शुभकामनाएं !
    सुभाष नीरव
    09810534373
    www.kathapunjab.blogspot.com
    www.setusahitya.blogspot.com
    www.gavaksha.blogspot.com
    www.srijanyatra.blogspot.com

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  4. दिल को छू गयी आप की कविता|

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  5. ब्लाग जगत की दुनिया में आपका स्वागत है। आप बहुत ही अच्छा लिख रहे है। इसी तरह लिखते रहिए और अपने ब्लॉग को आसमान की उचाईयों तक पहुचइये मेरी यही शुभकामनाएं है आपके साथ
    हमारे ब्लॉग पर आपका स्वागत है।
    मालीगांव
    साया
    आपकी पोस्ट यहा इस लिंक पर भी पर भी उपलब्ध है। देखने के लिए क्लिक करें
    लक्ष्य

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  6. ब्‍लाग जगत पर संस्‍कृत की कक्ष्‍या चल रही है ।

    आप भी सादर आमंत्रित हैं,
    http://sanskrit-jeevan.blogspot.com/ पर आकर हमारा मार्गदर्शन करें व अपने
    सुझाव दें, और अगर हमारा प्रयास पसंद आये तो हमारे फालोअर बनकर संस्‍कृत के
    प्रसार में अपना योगदान दें ।
    धन्‍यवाद

    ReplyDelete
  7. ब्‍लाग जगत पर संस्‍कृत की कक्ष्‍या चल रही है ।

    आप भी सादर आमंत्रित हैं,
    http://sanskrit-jeevan.blogspot.com/ पर आकर हमारा मार्गदर्शन करें व अपने
    सुझाव दें, और अगर हमारा प्रयास पसंद आये तो हमारे फालोअर बनकर संस्‍कृत के
    प्रसार में अपना योगदान दें ।
    धन्‍यवाद

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  8. बहुत सुंदर रचना है


    इस बार छिपा दूंगी में उसे किसी कोने में,
    नहीं चाहिए तुम्हारे होते हुए मुझे चाँद और चांदनी.
    और फिर बस में और तुम, और हमारी रात,
    तुम और तुम्हारी बात.
    बस तुम और तुम्हारी, मेरी बात.

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  9. आप तो बहुत सुंदर कवितायेँ लिखती है आप के ब्लॉग पर आया तो बहुत खुसी हुई ...आप ऐसे ही लिखती जाएँ ....

    **
    कुछ सपने लिखना ,
    कुछ लम्हे लिखना,
    जिन्हें अक्सर जीती हूँ मैं तुम्हारे लिए ,
    **

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  10. Mukesh jee..bahut bahut shukriya.

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  11. Subhash jee ..bahut bahut shukriya.

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  12. Patali-The-Village jee...thanx lot.

    ReplyDelete
  13. surendra jee ..aapki shubhkaamnaaon ke liye bahut bahut Abhaar.

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  14. Anand jee..bahut bahut shukriya.

    ReplyDelete
  15. Veena jee..tahe dil se shukriya..:)

    ReplyDelete
  16. बहुत सुंदर रचना
    विशेष:
    "नहीं चाहिए तुम्हारे होते हुए मुझे चाँद और चांदनी"

    ReplyDelete
  17. आपने कविता तो अच्‍छी लिखी है पर इसमें वर्तनी की गलती है। जहां आपको लूंगी लिखना था, वहां लुंगी लिख दिया है। अर्थ का अनर्थ हो ऐसा नहीं करना चाहिए
    अन्‍यथा न लें

    ReplyDelete
  18. Pavan jee meri trutiyon ki aur dhayaan dilaane ka bahut bahut shukriya. asha karti hoon aage bhi aap mera maarg darshan yunhi karte rahenge.

    ReplyDelete
  19. कल्पना को अच्छे पंख लगाए हैं आपने । अच्छा लगा । बधाई ,स्वागत ।

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  20. Hi..

    Yun to Pahli baar aapke blog par aaya hun..par kavitaon main ek suparichit ahsaas ho raha hai...
    kavita ahsaason se banti hain aur bhavnaon ka sangam hoti hain...aapki kavitayen bahut sundar lagin...Aaj se main bhi aapke blog ka follower hua...

    Deepak...

    ReplyDelete
  21. हिंदी ब्लाग लेखन के लिए स्वागत और बधाई
    कृपया अन्य ब्लॉगों को भी पढें और अपनी बहुमूल्य टिप्पणियां देनें का कष्ट करें

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  22. वाह नीलम जी !
    देर से आ पाया आपके ब्लॉग पर किन्तु पढ़कर मज़ा आ गया
    बहुत सुन्दर रचना है गुस्ताखी माफ़ पर एक विचार मन में उठा कई उसे लिखता हूँ

    "चाँद को तोड़ कर
    तुम देना फेंक
    गली के उस मोड़ पर
    जहाँ से कोई निहारता था तुम्हे
    कोई बचपन में खिड़की पर
    फिर हो गया गुम
    उसी मोड़ पर सदा के लिए
    चाँद के टुकड़ों को
    फेंक देना उसी मोड़ पर
    जहाँ से बदलते हैं
    तेरे और उसके रास्ते
    खुदा के वास्ते
    बिखेर देना चांदनी को
    उसी मोड़ पर
    जहाँ से आती है हवा
    उसकी भीनी महक लेकर ..."

    ReplyDelete
  23. चाँद के टुकड़ों को
    फेंक देना उसी मोड़ पर
    जहाँ से बदलते हैं
    तेरे और उसके रास्ते
    खुदा के वास्ते
    बिखेर देना चांदनी को
    उसी मोड़ पर
    जहाँ से आती है हवा
    उसकी भीनी महक लेकर ..."
    kya kahun Raaj jee.. kya likha hai aapne.ufff.
    bahut khoob.

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  24. chand ko kya maloom ki jalti hai kisi ki mohabbat uski chandani mai ...chupale gar khud ko badal mai to karar aaye ...

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  25. नहीं चाहिए तुम्हारे होते हुए मुझे चाँद और चांदनी.
    और फिर बस में और तुम, और हमारी रात,
    तुम और तुम्हारी बात.
    बस तुम और तुम्हारी, मेरी बात.-------------------------------बहुत कोमल एहसासों को आपने बड़ी खूबसूरती के साथ शब्दों में बांधा है।

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  26. नहीं चाहिए तुम्हारे होते हुए मुझे चाँद और चांदनी.
    और फिर बस में और तुम, और हमारी रात,
    तुम और तुम्हारी बात.
    बस तुम और तुम्हारी, मेरी बात.

    भावनात्मक अभिव्यक्ति की पराकाष्ठा

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