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Wednesday, September 29, 2010

क्यूँ ......


































क्यूँ ......
आज कल कुछ सूझता नहीं मुझे,
क्या कहूँ मैं तुमसे?
तुम ही कुछ कहो ना...
जब से तुमने मुझे अपना मान लिया है ,
ना जाने तब से शब्द कहाँ खो गए हैं,
बस अब धड़कने और मेरी साँसे बोलती हैं ,
ना जाने ,क्यूँ तुम उन्हें नहीं सुनते,
क्यूँ अपनी धडकनों से मेरी धडकनों की बात नहीं करते,
कल रात भी जब मैं तुम्हारे सीने पर सर रख कर बहुत कुछ कह रही थी ,

ख़ामोश से मेरे लब ,
शब्दों का बोझ उठा नहीं पा रहे थे,
तब मेरी धड़कने सब कह रहीं थीं,
तब भी तुमने कुछ नहीं सुना था,
है ना!!!!!
बस एक टक निहारते रहते हो मुझे ,
चूमते रहते हो मेरी बंद पलकों को,
और उस वक़्त...
मैं मर कर भी जी उठती हूँ ,
तुम्हारी बाहों में,
वादा करो.......
तुम मुझे यूँही जिंदा रखोगे ,
अपने ख्यालों में,
जैसे मैंने आज तक तुम्हे जिंदा रखा है अपनी रूह में ,
पल पल मरने के बाद भी ,
जी रही हूँ सिर्फ तुम्हारे लिए.

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27 comments:

  1. ख़ामोश से मेरे लब ,
    शब्दों का बोझ उठा नहीं पा रहे थे,
    तब मेरी धड़कने सब कह रहीं थीं,
    तब भी तुमने कुछ नहीं सुना था,
    है ना!!!!!


    वाह !

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  2. बहुत सुन्दर अहसास!

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  3. ehsasoka marmik chitran...
    sunder abhivykti.....

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  4. बहुत सुन्दर अहसास

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  5. बढ़िया... अच्छा लगा..

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  6. वादा करो.......
    तुम मुझे यूँही जिंदा रखोगे ,
    अपने ख्यालों में,
    जैसे मैंने आज तक तुम्हे जिंदा रखा है अपनी रूह में ,
    पल पल मरने के बाद भी ,
    जी रही हूँ सिर्फ तुम्हारे लिए.

    वाह्……………क्या अहसासों की माला बुनी है……………………।बहुत सुन्दर्।

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  7. Vivek jee.
    nilesh jee
    apnatva jee,
    mehfooz jee,
    prateek jee,
    vandana jee..aap sabhi ka dil se shukriya.

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  8. sukriya karen ya na.........lekin ye sachchai hai, aapki kavita bolti hai......:)
    aapke ahsaas ko salam!!

    "pal pal marne ke baad bhi j
    jee rahi hoon, tumhare liye........"

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  9. वादा करो.......
    तुम मुझे यूँही जिंदा रखोगे ,
    अपने ख्यालों में,
    जैसे मैंने आज तक तुम्हे जिंदा रखा है अपनी रूह में ,
    पल पल मरने के बाद भी ,
    जी रही हूँ सिर्फ तुम्हारे लिए.

    शायद इसी को प्यार कहते हैं ... गहरा लगाव कहते हैं ...

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  10. आशाओं की दुनिया का अहसास...कोमल भावनाओं को सुकोमल शब्दों में पिरोती हुई सुंदर पंक्तियां।

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  11. वाह!

    बहुत सुन्दर.

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  12. ये प्रेम के ही झौंके हैं जो रूह को छू जाते हैं...सुंदर अभिव्यक्ति

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  13. आज आपके ब्लॉग पर आ कर बहुत अच्छा लगा...जितनी खूबसूरत पेंटिंग आपने यहाँ सजा रखी है उतनी ही सुन्दर ज़ज्बात से भरी रचना आपने पेश की है...बेहतरीन रचना है...रूमानियत से लबरेज़...मेरी बधाई कबूल करें...

    नीरज

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  14. वादा करो.......
    तुम मुझे यूँही जिंदा रखोगे ,
    अपने ख्यालों में,
    जैसे मैंने आज तक तुम्हे जिंदा रखा है अपनी रूह में ,

    बहुत खूबसूरत एहसास ...रुमानियत भरे ...

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  15. वादा करो.......
    तुम मुझे यूँही जिंदा रखोगे ,
    अपने ख्यालों में,
    बहुत सुन्दर प्रेम रस मे सराबोर रचना। शुभकामनायें।

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  16. अहसासो से सजी आप की यह कविता बहुत सुंदर लगी, धन्यवाद

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  17. जीना
    जिसकी एक एक चढ़ाई
    सीढ़ी की लंबाई का
    कराती है अहसास
    वही है इस कविता
    के आसपास।

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  18. प्रेम की वेदना से तिक्त अनछुये भाव।

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  19. बस एक टक निहारते रहते हो मुझे ,
    चूमते रहते हो मेरी बंद पलकों को,
    और उस वक़्त...
    मैं मर कर भी जी उठती हूँ ,
    तुम्हारी बाहों में,

    vah.....kamaal ka ahsaas

    www.amarjeetkaunke.blogspot.com

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  20. जैसे मैंने आज तक तुम्हे जिंदा रखा है अपनी रूह में ,
    पल पल मरने के बाद भी ,
    जी रही हूँ सिर्फ तुम्हारे लिए.

    -वाह! सुन्दर अहसासों की बानगी!!

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  21. आप बहुत अच्छा लिख रहीं हैं आपके ब्लॉग पर एहसासों की गुनगुनाहट है आपने जो पेंटिंग लगायी है वह और भी खूबसूरत है .

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  22. असल में तो पल पल किसी पर मर कर ही जिया जाना ही असली जीना है।

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  23. .कोमल भावनाओं को सुकोमल शब्दों में पिरोती हुई सुंदर पंक्तियां।

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  24. कमाल की प्रस्तुति ....जितनी तारीफ़ करो मुझे तो कम ही लगेगी

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