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Wednesday, January 12, 2011

मुस्कान

 
 
उस सुंदर सी मुस्कान के पीछे
आँखों से मोती झरते थे!

भीगे भीगे कुछ सपने थे,
कुछ टूटे ,कुछ छूटे अपने थे!

उस सुंदर सी मुस्कान के पीछे,
आँखों से मोती  झरते थे!

कुछ पिघले पिघले पल अपने थे,
कुछ लम्हे भी तो कल अपने थे!

उस सुंदर सी मुस्कान के पीछे ,
आँखों से मोती झरते थे!

राहों मे यूँही चलते चलते,
मजिल से पहले वो हमसे रूठ चुके थे!

उस सुंदर सी  मुस्कान के पीछे ,
आँखों से मोती  झरते थे!

तन उसका भी गीला था, मन मेरा भी भीगा था,
आँखों की बरसात के चलते!

उस सुंदर सी मुस्कान के पीछे ,
आँखों से मोती  झरते थे!
 

 

78 comments:

  1. तन उसका भी गीला था, मन मेरा भी भीगा था,
    आँखों की बरसात के चलते!

    बेहतरीन रचना...बधाई

    नीरज

    ReplyDelete
  2. बेहतरीन रचना...बधाई

    ReplyDelete
  3. मोती झरते आँखों में मुस्कान आप ही समेट सकते हो शब्दों में...है न...:) और फिर इन मुस्कुराते अंशुओं के साथ आपने सपने भी देख डाले..:)

    बहुत खूब..........

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  4. कम शब्दों में अधिक कहने की क्षमता. ......... सुन्दर रचना.......... आभार.

    समय मिले तो यह भी देखें और तदनुसार मार्गदर्शन/अनुसरण करें. http;//baramasa98.blogspot.com

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  5. तन उसका भी गीला था, मन मेरा भी भीगा था,
    आँखों की बरसात के चलते!
    main bhi bheeg gai un aankhon ki barish me

    ReplyDelete
  6. उस सुंदर सी मुस्कान के पीछे
    मोती बेशक झरते थे

    वो दूर गया मजबूर गया
    दिल में अरमान पर मचलते थे

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  7. बारिशें छत पे खुली जगहों पे होती हैं मगर,
    ग़म वो सावन है जो इन कमरों के अंदर बरसे!
    .
    बहुत अच्छी और कोमलता लिए भावनात्मक कविता!!

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  8. कम शब्दों में अधिक कहने की क्षमता. ..
    आपको और आपके परिवार को मकर संक्रांति के पर्व की ढेरों शुभकामनाएँ !"

    ReplyDelete
  9. nice...loved it....keep it up...

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  10. Kritz..thanx dear..God bless u.

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  11. अति सुन्दर...................

    ReplyDelete
  12. भीगे भीगे कुछ सपने थे,
    कुछ टूटे ,कुछ छूटे अपने थे!
    बहुत अच्छे भाव ...

    ReplyDelete
  13. उस सुंदर सी मुस्कान के पीछे ,
    आँखों से मोती झरते थे!

    राहों मे यूँही चलते चलते,
    मजिल से पहले वो हमसे रूठ चुके थे!

    आदरणीय नीलम जी
    आपकी कविता की हर एक पंक्ति दिल पर असर कर गयी ....बहुत संजीदा तरीके से मन के भावों को अभिव्यक्त किया है आपने ..इतनी बढ़िया अभिव्यक्ति कि क्या कहने ..जो पंक्तियाँ मैंने यहाँ उठाई हैं इनका जबाब नहीं ..इतनी भावपूर्ण कविता के लिए आपका तहे दिल से आभार ..शुक्रिया

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  14. उस सुंदर सी मुस्कान के पीछे ,
    आँखों से मोती झरते थे!
    अंतर्मन के सच्चे भाव... मन को भिगोती रचना

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  15. Shukriya veena ji.
    Veena ji ne kaha.सुंदर रचना..


    http://veenakesur.blogspot.com/

    सादर
    वीना

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  16. भीगे भीगे कुछ सपने थे,
    कुछ टूटे ,कुछ छूटे अपने थे!//
    a poetic expression...

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  17. आपने ब्लॉग पर आकार जो प्रोत्साहन दिया है उसके लिए आभारी हूं

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  18. तन उसका भी गीला था, मन मेरा भी भीगा था,
    आँखों की बरसात के चलते!

    बहुत संवेदनशील भावपूर्ण प्रस्तुति..

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  19. bahut bhavpurna rachna.. badhai...!

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  20. काव्य में ,,,
    शब्द - शब्द में
    मुस्कान का जादू
    अपने होने का अहसास दिला रहा है .

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  21. @..Snjay ji, @Babban ji, @ Surendra ji, @ Gyaanchand ji, @ Kailash ji, @ aseem ji, @ Danish ji..aap sabhi ki main tahe dil se abhaari hon ki aapne apna kimti samay mujhe diya..bahut bahut shukriya aap sabhi ka.

    ReplyDelete
  22. उस सुंदर सी मुस्कान के पीछे ,
    आँखों से मोती झरते थे!
    bahut achchi lagi.

    ReplyDelete
  23. कुछ पिघले पिघले पल अपने थे,
    कुछ लम्हे भी तो कल अपने थे!

    बहुत ही सुंदर भाव हैं . आप की कलम को सलाम.

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  24. A smile tells hundred things. Nice one

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  25. राहों मे यूँही चलते चलते,
    मजिल से पहले वो हमसे रूठ चुके थे
    .

    achchee gazal

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  26. तन उसका भी गीला था, मन मेरा भी भीगा था,
    आँखों की बरसात के चलते!

    बेहतरीन

    ReplyDelete
  27. तन उसका भी गीला था, मन मेरा भी भीगा था,
    आँखों की बरसात के चलते!

    बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति.

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  28. एहसासों को समेटे सुन्दर रचना !

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  29. sundar aur sahityik rachna

    baanch kar achha laga

    badhaai !

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  30. कुछ पिघले पिघले पल अपने थे,
    कुछ लम्हे भी तो कल अपने थे!
    *
    - द्वंद्वात्मक भावनाओं को व्यक्त करने का सुन्दर प्रयत्न !

    ReplyDelete
  31. बेहतरीन रचना...वाह!!!

    ReplyDelete
  32. सुन्दर भावाव्यक्ति।

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  33. कुछ पिघले पिघले पल अपने थे,
    कुछ लम्हे भी तो कल अपने थे!

    samvedna से bheegi huyi .... ehsaas की duniya mein le jaati ... khwaabon ko jagaati ....
    Behatreen rachna है .

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  34. भीगे भीगे कुछ सपने थे,
    कुछ टूटे ,कुछ छूटे अपने थे!
    उस सुंदर सी मुस्कान के पीछे,
    आँखों से मोती झरते थे!

    वाह, क्या बात
    बहुत ही सुन्दर रचना
    बहुत पसंद आई आपकी कविता
    बधाई
    आभार

    ReplyDelete
  35. अपनी टिपण्णी दें...:)
    मुझे इसकी जरुरत है...
    आपके टि‍प्‍पणी मांगने के अंदाज में बड़ी ही साफगोई रही है। सारे ब्‍लॉगर कि‍तने ही शब्‍दों में लपेट कर यही बात कहते हैं। कोई भी खुल्‍लमखुल्‍ला सामने नहीं आता। सच को स्‍वीकारने की हि‍म्‍मत के लि‍ये मुस्‍कान आप बधाई की पात्र हैं।
    रही कवि‍ता की बात तो मुझे लगता है यह एक भाव प्रवाह था और इसे कागज पर बहने में बहुत ही कम समय लगा होगा। लोग तुक मि‍लाने, भावों को दुरूहतम करने और जाने कि‍स असंभव सी अभि‍व्‍यक्‍ि‍त को परोसने में घंटों लगाते देखे हैं, उस के मुकाबले यह सरल अभि‍व्‍यक्‍ति‍ है।

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  36. उस सुन्दर सी मुस्कान के पीछे कितने आंसूं झरते थे ....
    मुस्कुराती आँखों में भी आंसू होते है , कितने लोग जानते हैं !
    भीगा दिया है कविता ने !

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  37. कोमल भावुक भावाभिव्यक्ति...
    मेल कर सूचना देने और एक सुन्दर रचना पढने का अवसर देने के लिए आभार...

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  38. मन भीग गया। कुछ कहने का मन नहीं, बस ये शे’र

    आंखे बरस रही हैं बरसात कैसे कहूँ
    तेरी वजह से दिन को रात कैसे कहूँ
    जो कुछ भी हो रहा है शामिल उसमें तू भी
    मैं सिर्फ इन को हालात कैसे कहूँ ।

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  39. Kahti ho ki...
    mujhe aapki tippani ki zarrorat hai.

    Sainny ji to chale gaye
    apna password dekar...

    Unhen phone par tumahari baat sunaai
    to bole ki yae bhej do :

    "Kabhi aah dil se nikal gai
    Kabhi ashk aankh se dhal gaye...
    Ye tumahare gam ke charaag hain...
    Kabhi bujh gaye kabhi jal gaye..."

    Neelu!
    Bahut sundar hai tumahara sansaar!
    Ham sabke Pyaar!!

    Aur haan ...
    Yahaan bhi aana yaar :

    http://snowaborno.blogspot.com

    Sasnesh,

    Apara

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  40. कुछ पिघले पिघले पल अपने थे,
    कुछ लम्हे भी तो कल अपने थे!


    एक अधूरी चाहत
    यह रातें यह मौसम यह सपना सुहाना
    उन्हें ना भूलाना भूलना हमें भूल जाना

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  41. बधाई इस सुन्‍दर भावाभिव्यक्ति के लिये ।

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  42. सुंदर मुस्कान के पीछे आपने झाँका, हमने देखा...

    सुंदर अभिव्यक्ति

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  43. बहुत ही सुन्दर और कम शब्दों में दिल को छू लेने वाली रचना. इतना ही कहूँगा की आपने अपने मन में उठने वाले भावो को शब्दों में पिरो कर जो कविता लिखी है उसके लिए आप बधाई की पात्र है. मेरी शुभकामनाये स्वीकार करे. फर्क मात्र इतना है की मै कुछ ऐसे ही भावो से गुफ्तगू करता हूँ. आपका भी मेरी गुफ्तगू में स्वागत है.
    www.gooftgu.blogspot.com

    ReplyDelete
  44. जो कुछ अपना था वो कल था...''आंसू'' हो या फिर ''हँसी''..अब तो आंसू भी भाप बन के उड़ गए एक शुष्क नज़र छोड़ गए..और हँसी...वो तो चाशनी में पक-पक कर कड़ी हो गयी..जिंदगी की आंच कुछ ज्यादा ही तेज़ रही शायद ..पर आपकी कविता में..वो पहले सी भीगी आँखों की नम मुस्कान..एक सीधी सच्चाई बयान कर गयी..सुन्दर कविता केलिए बधाई ..नहीं मेरी टिप्पड़ी की आपको कोई आवश्यकता नहीं..आप गुनी जनों से घिरी हैं..पर कुछ कहने से खुद को रोक नहीं पाई..

    ReplyDelete
  45. उस सुंदर सी मुस्कान के पीछे
    आँखों से मोती झरते थे!

    भीगे भीगे कुछ सपने थे,
    कुछ टूटे ,कुछ छूटे अपने थे!
    बहुत अच्छी रचना...दिल को छूती हुई.

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  46. नीलमजी
    सुंदर सी मुस्कान को सार्थक कर दिया आपकी लेखनी ने
    आपको बधाई

    ReplyDelete
  47. wesai muje lagta hai aap ko aap ke es Blog par already etne comments mil chuke hain kuch khene ko baki he nahi raha.... kintu fir bhi aapne muje mail kiya usske liye many thanks....muje aapka poora Blog bahut accha laga aur sab se zyada muje wo painting bahut acchi lagi jo aapne lagaye hai...bahut he khubsuart painting ka istemaal kiya hai aapne apne Blog ke liye ...ese zayada aur kya kahun baki sabhi ne sabhi kuch kheh hee diya hai...ho sake tho kabhi aap bhi mere Blog par aiiyegaa aur padhkar apnee mahtvpoorn comments se muje avagat karviyegaa...best wishes and keep writing...http://mhare-anubhav.blogspot.com/

    ReplyDelete
  48. कुछ पिघले पिघले पल अपने थे,
    कुछ लम्हे भी तो कल अपने थे!

    उस सुंदर सी मुस्कान के पीछे ,
    आँखों से मोती झरते थे!
    बहुत सुन्दर गीत है। मुस्कान के पीछे हमेशा आंम्सू होते हैं । तभी तो जोर से हंसने पर बह जाते हैं । अच्छी लगी रचना बधाई।

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  49. Main aaap sabki tahe dil se abhaari hoon aap sabhi ne apna keemti waqt meri ghazal ko padhne ke liye nikala..shukriya aap sabhi ka.
    thanx lot.

    ReplyDelete
  50. Rajey shah ji..
    bahut bahut abhaar.
    ji sach klaha aapne baahut kam samy laga tha mujhe ye likhne main..mann ke bhaavon ko seedhe aur saral shabdon main vyakt karti hoon.shayad isliye waqt kam lagta hai...ise likhne main 10 mnt se bhi kam ka samay laga.
    aap meri ek aur rachna hai jise maine ..chat par baat karte karte likh diya tha...uska link main yahan de rahi hoon...
    http://neelamkashaas.blogspot.com/2010/07/blog-post_22.

    ReplyDelete
  51. Pallavi ji...
    comment to mujhe sach main bahut mile..magar tippaniyaan thodi kam hai..agar wo bhi mil jaayen to kuchh aur achha seekh paayun main...[:)]
    aap sabhi ka bahut bahut shukriya.

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  52. मुस्कान लब्ज को बयां करने वाली बहुत ही अच्छी रचना है आपकी
    हमारे ब्लॉग पर आपका स्वागत है।

    मालीगांव
    साया
    लक्ष्य

    हमारे नये एगरीकेटर में आप अपने ब्लाग् को नीचे के लिंको द्वारा जोड़ सकते है।
    अपने ब्लाग् पर लोगों लगाये यहां से
    अपने ब्लाग् को जोड़े यहां से

    ReplyDelete
  53. bahut sundar abhivyakti. neelam jee jo bhav man men umadate hain aur vah seedhe pashton par jate hain. na unamen kuchh jodane ki jaroorat hoti hai aur na hi kisi sudhar kee. aisi hi rachna seedhe man ko chhoo leti hain.

    ReplyDelete
  54. bhtrin rchnaa mubaark ho. akhtar khan akela kota rajsthan

    ReplyDelete
  55. उस सुंदर सी मुस्कान के पीछे,
    आँखों से मोती झरते थे!

    कुछ पिघले पिघले पल अपने थे,
    कुछ लम्हे भी तो कल अपने थे!

    बहुत ख़ूब!
    अक्सर मुस्कान के पीछे मोती होते हैं ,
    लेकिन उन भावनाओं को काव्य में बहुत ख़ूबसूरती से ढाला है आप ने


    भीगे भीगे कुछ सपने थे,
    कुछ टूटे ,कुछ छूटे अपने थे!

    वाह !

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  56. उस सुंदर सी मुस्कान के पीछे ,
    आँखों से मोती झरते थे!

    बहुत भावपूर्ण रचना.

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  57. उस सुंदर सी मुस्कान के पीछे ,
    आँखों से मोती झरते थे!

    बहुत सुंदर भावों से पूर्ण रचना

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  58. achchhi kavita hai jisne samvednaon ki sunder abhivyakti hui hai. badhi.

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  59. तन उसका भी गीला था, मन मेरा भी भीगा था,
    आँखों की बरसात के चलते!

    aapki kavita ko salaam, aapke shabdo ne jaise jaadu kar diya hai

    badhayi sweekar kare..

    vijay

    ReplyDelete
  60. राहों मे यूँही चलते चलते,
    मजिल से पहले वो हमसे रूठ चुके थे!

    उस सुंदर सी मुस्कान के पीछे ,
    आँखों से मोती झरते थे!
    ..sundar komal bhawanon ko bakhubi piroya hai aapne.. bahut sudar geet ..dil se likha hua..badhai

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  61. अच्छी कविता......गीत सा है..गुनगुना रहा हूं....

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  62. Chitron ka janam shabdon ki kamzoriyan door karne k liye hua. Aap chitron ko sashakta shabd de rahin hain.
    Badhai.

    ReplyDelete
  63. भीगे भीगे कुछ सपने थे,
    कुछ टूटे ,कुछ छूटे अपने थे!

    बहुत सुन्दर रचना । बधाई स्वीकारे ।

    ReplyDelete
  64. बहुत सुन्दर रचना । बधाई स्वीकारे ......

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  65. आदरणीय नीलम जी
    चलते -चलते पर देखिये
    ब्लॉगरीय षटकर्म ...आपकी प्रतिक्रिया महत्वपूर्ण है ...शुक्रिया

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  66. उस सुंदर सी मुस्कान के पीछे
    आँखों से मोती झरते थे!

    भीगे भीगे कुछ सपने थे,
    कुछ टूटे ,कुछ छूटे अपने थे!

    खूबसूरत भीगी भीगी सी रचना .....

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  67. Surendra ji, @Akhtar ji @ Rekha ji, Ismat Ji aap sabhi ka bahut bahut shukriya. Aage bhi aap meri housla afzai karte rahiyega .
    Abhaar.

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  68. Bhushan ji <Veena ji < Ramesh ji ,Vijay Ji, kavita ji..bahut bahut abhaar.

    ReplyDelete
  69. तन उसका भी गीला था, मन मेरा भी भीगा था,
    आँखों की बरसात के चलते!

    उस सुंदर सी मुस्कान के पीछे ,
    आँखों से मोती झरते थे!


    sundar ati sundar

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  70. khubsurat ehsas
    http://shayaridays.blogspot.com

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  71. bahut sundar....apratim rachnaye...keep it up neelu.......

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